| شب بود وظلمت بود وغم بر روي غم بود |
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| داد از سيـــاهي بود و فـــرياد از ســتم بود |
| شــب بــود واز تاريكيش عــالم سيـه روز |
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| شـــام غـــريبــان در بـــرش روز دلافروز |
| دنيــا بديــن پهنـاوري چــونــان قفــس بود |
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| آزادي آزادگــــــان حــــــــقِّ نفـــــس بــــود |
| هر جــا حــكايت از سكــوت مــرگـــبــاري |
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| هر جـــا روايـــت از خـــزان بـــيبهــــاري |
| بلبــل زِبـــاغ و گـــل زِبســتان رخـت بسته |
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| هم شمعها خواموش و هم پروانه خستـه |
| بـــا خــنجر غــم سيـــنه ي شــادي دريـــده |
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| رنــــگ از رخ زيــــبـــاي آزادي پــــريـــده |
| پـــــاي عـــدالت بـــسته و دســـت ستم باز |
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| مظلـــوم ســـرافـــكنده و ظـــالم ســـرافراز |
| مردان حـــق گر آيـــتي از نـــور خــواندند |
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| پـــاداشــشان را گـــوشه ي زندان ستاندند |
| احـــكام قرآن بــــر فرامـــوشـــي گـــراييد |
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| نـــــور هـــــدايت رو بخـــــاموشي گـــراييد |
| هـــــر كـــس به راه ميـــثم تمّـــار ميرفت |
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| از راه حـــق گــويي سرش بر دار ميرفت |
| فرهنــــگ, آن ايّـــام معـــناي دگــر داشت |
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| هـــر بيهنر تكيـــه بر او رنـگ هنر داشت |
| با دسـت, جاهـــل پـــاي عــــالم بود در بند |
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| بگـــــرفته هـــــر بــــيدانشي جاي خردمند |
| زهر هــلاهل خــــــلق را در كــــــام كردند |
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| بـيعفّتــــيهــــــا را تمـــــــدّن نــــام كردند |
| هر گوشهاي از محـنت و غـــم نينوا بـــود |
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| گو بـــا زميــــن و آســـمان كرب و بلا بود |
| ناگه در آن تاريك شــــب ماهــــي درخشيد |
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| خورشيد خـــاور شــــد به دلها نور بخشيد |
| شـــب شد فـــــراري بـــــاز از نو روز آمد |
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| روز نـــــــو آمد بهــــــتر از نـــــوروز آمـد |
| بُد سالها نـــــوروز اســـــمي بيمســــــمّا |
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| نـــــوروز را ايـــن روز نـــو بخـــشيد معنا |
| روح اللّـــهي با معـــجز عيــسيٰ عيان شد |
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| ايــن ملّت دل مــــــرده را روح روان شـــد |
| معنــــــاي انسان را به انسانها بياموخت |
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| ايـــن كـــاروان را او چـــراغ ره بيفروخت |
| مســــتضعفين را وجد و شوق و شور آمد |
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| مـــوسيٰ مـــگر بـــار دگـــر از طـــور آمـد |
| اين مـــوسوي اعجاز موسيٰ بيعصا كرد |
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| مكـــر و فـــريب ســـاحـــران را برملا كرد |
| ما ســـالها از خـــويش هــم بيگانه بوديم |
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| غـــافل زِكـــعبه راهـــي بتخـــانه بـــوديـــم |
| چـــون رهـــبر آمـــد بـــر تن مـا روح آمد |
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| بر كـــشتي طـــوفـــاني مـــــا نـــــوح آمـــد |
| در مـــاه بـــهمن از ســفر باز آمد اين ماه |
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| ايــن ماه بـــهـــمن فـــروديــن آورد همراه |
| اندر زمـــستان ايــــن بهـــار آســان نيامد |
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| تــــا جــــان نــــداديم آن هـمه, جانان نيامد |
| اهــــل وطــــن از نـــــو به تن نيرو گرفتند |
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| خــــوب انتقــــام از دشـــــمن بَد خو گرفتند |
| ما وارث خــــــون شهــــيدانــــيم امــــروز |
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| مــــرهـــــون ســـعي آن عــزيزانيم امروز |
| هان اي برادر خيز از جا وقت كـــار است |
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| منشين دمي غافل كه دشمن هوشيار است |
| در دست ما از ديگران است اين امــــانت |
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| هـــــرگز روا نبــــود امــــانت را خــــيانـت |
| مــــا را نهـــــــال آرزوهــــا گر ثــــمر داد |
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| خون رجــــاييها و خــــون بــــاهـــــنر داد |
| آزادهاي چــــون دســــتغيب از دست داديم |
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| بر قـــــلّه ي آزادگــــي تا پـــــا نهـــــاديــــم |
| از اين همـــــه عـــــزّت كه بخشيدند ما را |
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| بـــــر خـــــــاك نه پيشــــاني شكر, خــدا را |
| تنـــــها نه شـــــايد با زبان شــكرِ خدا كرد |
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| كي مـــــيتوان با حــرف دردي را دوا كرد |
| شــــكر توانـــايي كمـــك بر ناتـــوان است |
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| يـــاري بــه پيران شكر بازوي جوان است |
| جســـم شهـــيدان معنــي زيباي شكر است |
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| در چـــهره ي آزادگـــان سيماي شكر است |